हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अहले बैत फ़ाउंडेशन के उपाध्यक्ष सय्यद तक़ी अब्बास रिज़वी कलकत्तवी ने सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई की शहादत पर संवेदना व्यक्त की है जिसका पूरा पाठ इस प्रकार हैः
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्राहीम
कालल्लाहो तबारका तआलाः वला तहसबन्नल लज़ीना क़ोतेलू फ़ी सबीलिल्लाहे अमवाता बल अहयाउन इंदा रब्बेहिम युरज़क़ूना
इन्ना लिल्लाहे वा इन्ना इलैहे राजेऊन
शनिवार 10 रमज़ान, 28 फरवरी 2026 की सुबह अमेरिकी और इज़रायली आतंकवादी और बुज़दिलाना हमले मे आयतुल्लाह ख़ामेनई की शहादत के बाद, पूरे आलम इंसानीयत मे ग़म और गुस्से की लहर दौड़ गई है। ऐसा क्यो न हो कि इस हमले मे न केवल सुप्रीम लीडर, बल्कि उनकी बेटी, नवासा और परिवार के दूसरे लोग भी हक़ीक़ी रब से जा मिले। इस दर्दनाक घटना पर हम दिल की गहराईयो से अपने सुप्रीम लीडर की शहादत पर गहरा ग़म व्यक्त करते हुए इस हमले की कड़ी निंदा करते है।
हज़रत आयतुल्लाह सय्यद अली हुसैनी ख़ामेनई जो चार दशको से ईरान और इस्लामी उम्मत का नेतृत्व और मार्गदर्शन कर रहे थे, अपनी 37 वर्षो पर आधारित साहसी नेतृत्व की बदौलत अमेरिका, इज़रायल और उनके इस्लाम दुशमन साथीयो के सामने सीसा पिलाई दीवार बन कर खड़े रहे।
क्या लोग थे कि राहे वफ़ा से गुज़र गए जी चाहता है पदचिंह चूमते चलें
इस 86 वर्षीय वरिष्ठ विद्वान, मुजाहिद और शियो के मरजअ तक़लीद हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली हुसैनी ख़ामेनई का संबंध केवल ईरान से नही था, बल्कि वह आज़ादी पसंद मार्गदर्शक थे। आपकी शहादत एक असहनीय घटना है। इस दर्दनाक शहादत पर परी इस्लामी मानवता, इस्लामी उम्मत और विशेष रूप से ईरान की सम्मानित, बहादुर जनता के सेवा मे संवेदना व्यक्त करते है।
सुप्रीम लीडर की शहादत इस समय हुई जब वह लंबे समय से खुदा वंदे आलम से शहादत की तमन्ना रखते थे, और अंतः अल्लाह ने उन्हे रमज़ान के पवित्र महीने मे इन वर्षो की खालिस इबादत, निरंतर मुजाहेदा और बुद्धिमत्तापूर्ण धैर्य और दृढ़ता के बदले मे शहादत जैसा बड़ा इनाम प्रदान किया। हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई ने अपने जीवन को इस्लाम मुहम्मदी के अरमानो की पूरती और ईरान के सम्मान के लिए समर्पित किया, और आखिर मे अल्लाह ने उन्हे शहादत प्रदान की।
सुप्रीम लीडर की शहादत इस्लामी जगत, विशेष कर मध्यपूर्व एशिया मे एक नई क्रांति की नवेद साबित होगी और उनका मिशन सदैव जारी रहेगा। उनके बुद्धिमत्तापूर्ण नेतृत्व ने क्रांति के मार्ग को इतना प्रकाश दिया कि वह न केवल ईरान, बल्कि पूरी दुनिया मे उपनिवेशवाद के खिलाफ़ जिद्दो जहद का चिराग बनकर रौशन हुए। उनकी शिक्षाओ ने अमेरिका और इजरायली शक्तियो की जड़ो को कमज़ोर कर दिया और उन्हे वैश्विक स्तर पर अपमान और रुस्वाई का सामना करा दिया।
हम खुदा के शुक्रगुज़ार है कि हमे इस महान लीडर का नेतृत्व मे जीवन बिताने और उनसे लाभांवित होने का अवसर मिला। हम गर्व करते है कि हम उनके आदेश का पालन करते है। उनका व्यकतित्व इस अज़मत की हामिल थी कि मासूमीन (अ) के बाद, बहुत कम लोग उनकी तरह पूर्ण व्यक्तित्व रखते थे। वह एक फ़कीह और जामेअ शराइत, बहादुर और बुद्धिमान सेनापति, उच्च कोटि के साहित्यकार और मुत्तक़ी विद्वान थे, जिनकी शख्सियत न केवल अनुसरणकर्ताओ बल्कि विरोधीयो तक पर असर अंदाज़ हुई।
अंत मे टूटे हुए दिल और रोती हुई आखो के साथ दिल के खुलूस से हम अहले बैत फ़ाउंडेशन के सदस्य अपने इमाम वक़्त, मुंजी ए बशरीयत हज़रत वली अस्र (अ), ईरानी जनता, इस्लामी उम्मत और दुनिया के सभी आज़ादी पसंद लोगो की सेवा मे संवेदना व्यक्त करते है। अल्लाह तआला से दुआ करता हूं कि इस शहीद को बुलंद दरजात और अल्लाह के वलीयो के साथ हम नशीनी प्रदान करे, ईरानी जनता को धैर्य, दृढ़ता प्रदान करे।
वस्सलाम अला मनित तबअ अल हुदा
सय्यद तक़ी अब्बास रिजवी कलकत्तवी
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